शेष राज प्रजापति


हरिवंश रॉय बच्चन के अनंत प्रयाण पर सादर श्रृद्धा सुमन
August 20, 2010, 4:06 pm
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सृष्टि की रचना ने जिसे थका डाला,

अब और नहीं कुछ वह करने वाला ,

सुस्ता कर उसने पञ्च तत्वों का,

अर्क अद्वितीय नशीला बना डाला ,

सारे जल की बना दी हाला ,

और सारी मिटटी का प्याला ,

आहे पवन, अग्नि उर ज्वाला

खुद अनंत में बन बैठा मधु शाला ,

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June 17, 2010, 3:01 pm
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मेरे घर के आगे पेड़, मेरे घर पीछे पेड़,
मेरे गाँव में पेड़, मार्ग में पेड़,
 खेत में पेड़, खलिहान में पेड़,
मंदिर  में पेड़, मसान में पेड़,
जंगल में पेड़, गढ़ में पेड़,
मिट्वाद में पेड़, गुवाड़ी में पेड़,
 पेड़ ने मत काट,, मत छेड़,
मत काटने दे किसी को पेड़ ,
हो सके तो लगा पेड़,
 मिट जायेंगे हम सब,
अगर मिट गए पेड़,
आने वाली पिदीया पहचान सके पेड़,
इसलिए हर हालत में बचने चाहिए पेड़ !



चाहत
May 7, 2010, 12:59 pm
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कोई रौशनी कोई चमक नहीं मुझमे,
फिर भी चाहत है की जुगनू या सितारा हो जाऊ,
कोई कशिश नहीं कोई फन  नहीं,
लेकिन दुआ करो लोगो की सबका प्यारा हो जाऊ..
कभी पढ़ नही पाया, कभी लिख नहीं पाया,
 चाहता हु की कित्ताबो में जगह पा जाऊ .
पूजा कर नही पाया, नमाज अदा कर नहीं पाया,
चाहता हु की प्रभु की कृपा पा जाऊ.
दान कर नहीं पाया,  मदद दे नहीं पाया,
चाहू की जन्नत पा जाऊ,
कभी हिलने की कोशिश नहीं की,  कभी चल नहीं पाया,
आज चाहता हु कि परिंदों के से पंख पा  जाऊ.